
न जाने क्यूँ होता है ये ज़िन्दगी के साथ
अचानक ये मन किसी के जाने के बाद
करे फिर उसको याद
न जाने क्यों वो अनजान पल
वही है डगर, वही हम सफ़र
है नही साथ मेरे मगर
अब मेरा हम सफ़र
इधर-उधर ढूंढे नज़र
वही है डगर,
वही तेरे मेरे
वो दिन गए किधर
न जाने क्यूँ वो अनजान पल.......
करे फिर उसको याद
न जाने क्यों वो अनजान पल
वही है डगर, वही हम सफ़र
है नही साथ मेरे मगर
अब मेरा हम सफ़र
इधर-उधर ढूंढे नज़र
वही है डगर,
वही तेरे मेरे
वो दिन गए किधर
न जाने क्यूँ वो अनजान पल.......

This comment has been removed by the author.
ReplyDeleteso nice dear keep it up
ReplyDeletemy sweetu
"Wahi hai dagar ,,,,,,
Wahi tere mere ,,
Wo din gaye kidhar"
na jane kyu wo anjan pal
kya kre dil ki duniya bhi ajib hoti hai
duriya bhi hai to kya hua
tanhaiyo mai bhi yaadon ki mehfil hoti hai.
sunder rachna rohit.... keep it up...
ReplyDelete